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कपड़ों को सही नाप, डिजाइन और फिटिंग के अनुसार सिलने की कला को टेलरिंग कहते हैं।
माप (Measurement) का महत्व – सही माप से ही कपड़ा आरामदायक और सुंदर फिट होता है।
कपड़े की पहचान – सूती, रेशमी, ऊनी, पॉलिएस्टर जैसे कपड़ों की अलग अलग सिलाई तकनीक होती है।
सिलाई मशीन का ज्ञान – मशीन के भाग, टांका (Stitch) और गति का सही उपयोग आना चाहिए।
कटिंग स्किल – कपड़े की सही कटिंग से ही ड्रेस का शेप अच्छा बनता है।
डिजाइन और फैशन समझ – नए फैशन ट्रेंड और डिजाइन की जानकारी टेलर के लिए जरूरी है।
फिटिंग और अल्टरशन – कपड़े में सुधार (छोटा बड़ा करना) टेलरिंग का अहम हिस्सा है।
धागा और सुई का चयन – कपड़े के अनुसार सही धागा और सुई चुनना जरूरी होता है।
समय प्रबंधन – समय पर कपड़े तैयार करना ग्राहक संतुष्टि बढ़ाता है।
कमाई और रोजगार – टेलरिंग से घर बैठे या दुकान खोलकर अच्छा रोजगार और आय प्राप्त की जा सकती है।
अगर चाहें तो मैं टेलरिंग सीखने के आसान स्टेप्स, कोर्स की जानकारी, या कमाई के तरीके भी बता सकता हूँ।
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